सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

रजनी मन्नू भंडारी

 

कक्षा 11वीं हिंदी — ‘रजनी’

लेखिका — मन्नू भंडारी

अति महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. ‘रजनी’ पाठ का प्रतिपाद्य लिखिए।

उत्तर: ‘रजनी’ पाठ शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण और ट्यूशन की समस्या को उजागर करता है। पाठ में दिखाया गया है कि कुछ शिक्षक विद्यार्थियों को ट्यूशन के लिए मजबूर करते हैं। रजनी अन्याय और भ्रष्ट व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाती है। पाठ हमें अन्याय का विरोध करने तथा सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है। 

प्रश्न 2. रजनी ने अमित के मुद्दे को गंभीरता से क्यों लिया?

उत्तर: रजनी ने अमित के मुद्दे को इसलिए गंभीरता से लिया क्योंकि वह अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस रखती थी। उसे लगा कि अमित के साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है और शिक्षा के नाम पर ट्यूशन का दबाव बनाया जा रहा है। 

प्रश्न 3. रजनी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: रजनी साहसी, संघर्षशील, निर्भीक, जागरूक और अन्याय-विरोधी महिला है। वह अपनी बात स्पष्ट रूप से कहती है और गलत व्यवस्था के सामने झुकती नहीं है। उसमें लोगों को संगठित करने तथा समस्या के समाधान के लिए संघर्ष करने की क्षमता है। 

प्रश्न 4. अमित अपने गणित के अध्यापक से नाराज न होकर अपनी माँ से क्यों नाराज होता है?

उत्तर: अमित को लगता है कि उसके कम अंक आने का कारण उसके गणित शिक्षक द्वारा उसे ट्यूशन लेने के लिए मजबूर करना है। फिर भी वह शिक्षक से सीधे विरोध नहीं करता, बल्कि अपनी माँ से इसलिए नाराज होता है क्योंकि माँ उसकी समस्या को समझने के बजाय उसे ट्यूशन दिलाने की बात करती है।

प्रश्न 5. ट्यूशन पढ़ाने वाले पाठक जी अमित को ट्यूशन पढ़ने के लिए किस प्रकार बाध्य करते हैं?

उत्तर: पाठक जी अमित को डराते हैं कि यदि वह ट्यूशन नहीं पढ़ेगा तो उसके अंक अच्छे नहीं आएँगे। वे परीक्षा में कठिन प्रश्न आने और अच्छे अंक न मिलने का भय दिखाकर विद्यार्थियों को ट्यूशन लेने के लिए मजबूर करते हैं।

प्रश्न 6. ‘रजनी’ पाठ में शिक्षा के व्यवसायीकरण की समस्या किस प्रकार सामने आती है?

उत्तर: पाठ में कुछ शिक्षक विद्यालय में पढ़ाने के बावजूद विद्यार्थियों को अलग से ट्यूशन लेने के लिए प्रेरित करते हैं। ट्यूशन शिक्षा का माध्यम न रहकर कमाई का साधन बन जाती है। इस प्रकार शिक्षा के व्यवसायीकरण की समस्या सामने आती है।

प्रश्न 7. सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर ‘रजनी’ पाठ के आधार पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: पाठ में सरकारी कार्यालयों की उदासीन और टालमटोल वाली कार्यप्रणाली दिखाई गई है। अधिकारी आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते। काम करवाने के लिए लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरियाँ सामने आती हैं।

प्रश्न 8. ‘रजनी’ पाठ हमें क्या संदेश देता है?

उत्तर: यह पाठ हमें अन्याय और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने का संदेश देता है। यदि समाज अन्याय को चुपचाप सहन करता रहेगा तो गलत व्यवस्था मजबूत होती जाएगी। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर गलत बात का विरोध करना चाहिए।

प्रश्न 9. ‘रजनी’ मूलतः क्या है?

उत्तर: ‘रजनी’ मूलतः एक पटकथा है, जिसकी लेखिका मन्नू भंडारी हैं। इसमें संवादों और घटनाओं के माध्यम से सामाजिक समस्या को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। 


प्रश्न 10. ‘रजनी’ पाठ में अध्यापकों की कौन-सी समस्याएँ सामने आती हैं?

उत्तर: पाठ में बताया गया है कि कई निजी विद्यालयों में अध्यापकों को कम वेतन मिलता है। उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए ट्यूशन पर निर्भर रहना पड़ता है। कुछ विद्यालयों में कम वेतन देकर अधिक राशि पर हस्ताक्षर करवाने जैसी समस्याएँ भी दिखाई गई हैं

प्रश्न11. शिक्षा के व्यवसायीकरण की समस्या पर ‘रजनी’ पाठ के आधार पर प्रकाश डालिए।

उत्तर— ‘रजनी’ पाठ में शिक्षा के व्यवसायीकरण की समस्या को उजागर किया गया है। कुछ शिक्षक विद्यालय में पढ़ाने के बजाय विद्यार्थियों को ट्यूशन लेने के लिए मजबूर करते हैं। इस प्रकार शिक्षा सेवा के स्थान पर कमाई का साधन बन जाती है। 



एक अंक वाले बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न

1.‘रजनी’ की लेखिका कौन हैं?

→ मन्नू भंडारी।

2.‘रजनी’ की विधा क्या है?

→ पटकथा।

3.रजनी किस समस्या के विरुद्ध आवाज उठाती है?

→ शिक्षा के व्यवसायीकरण और ट्यूशन की समस्या के विरुद्ध।

4.अमित किस विषय में कमजोर था?

→ गणित में।

5.रजनी का प्रमुख गुण क्या है?

→ अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना।

6.‘रजनी’ पाठ में किस सामाजिक बुराई को प्रमुखता से दिखाया गया है?

→ शिक्षा के व्यवसायीकरण को।

7.रजनी किस प्रकार की नारी है?

→ निर्भीक, संघर्षशील और जागरूक नारी।

8.रजनी ने किसके अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई?

→ अमित के साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध।


श्री मती ज्योति धाकड़ 

उच्च माध्यमिक शिक्षक 

रविवार, 5 जुलाई 2026

नमक का दारोगा

                                  पाठ का नाम - नमक का दारोगा 

                                                लेखक का नाम  - प्रेमचंद 

                                                 लेखक का मूल नाम - धनपत राय 

 जन्म  = 1880 लमही गांव उत्तरप्रदेश                

    

प्रमुख रचनाएं = गबन , गोदान ,सेवा सदन 

 मृत्यु . =1936

   प्रश्न. 1 कहानी का कौन सा प्राप्त पत्र आपको सर्वाधिक प्रभावित करता है और क्यों?

उत्तर =  कहानी का नायक बंशीधर सबसे ज्यादा प्रभावित करता है क्योंकि वह ईमानदार, कर्मयोगी  व्यक्ति थे  उनके घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थीं  इसके बाद भी उन्होंने ईमानदारी नहीं  छड़ी उनके पिता उनको ऊपरी आय पर नजर   रखने की सलाह देते थे मगर उन्होंने उनकी बात नहीं मानी और ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन किया 

प्रश्न. 2 नमक का दरोगा कहानी में पंडित अलोपीदीन के व्यक्तित्व के कौन से दो पहलू (पक्ष) उभर कर आते हैं?

उत्तर 2  पहला पक्ष= पंडित अलोपीदीन को धन का बहुत घमंड थाकोशिश  की  गिरफ्तार होने के बाद जब अदालत में लाया गया तो उसने वहां भी वकीलों और गवाहों को खरीद लिया अपने और अपने आप को सभी आरोपों से बाहर कर के बेईमान और चालक ने का सबूत देते हैं 

दूसरा पक्ष = पंडित आलोक दिन के व्यक्तित्व का दूसरा पृथ्वी है जो बेहद प्रसंस नहीं है बंशीधर को दरोगा की नौकरी से निकलवा  दिया बाद मैं मन ही मन बहू पछतावा हुआ क्योंकि वह जानता था कि आज के वक्त में बंशीधर जैसा ईमानदार वह कर्तव्य परायण व्यक्ति मिलना मुश्किल है इसलिए उसने बंशीधर को अपनी सारी जायदाद का स्थाई मैनेजर नियुक्त कर दिया 

प्रश्न. 3 नमक का दरोगा कहानी के दो अन्य शीर्षक बताते हुए उसके आधार को भी स्पष्ट कीजिए? 

उत्तर 3=1.  धर्मनिष्ट दारोगा = यह कहानी पूरी तरह से बंशीधर की ईमानदारी पर टिकी है जो भ्रष्ट लोगों के बीच रहकर भि अपने कर्तव्य को पूर्ण ईमानदारी के साथ निभाता है 

 2. ईमानदारी का फल= दारोगा बंशीधर की ईमानदारी के कारण ही उसे अंत में पंडित अलोपीदीन म अपने स्थाई मनेजर  नियुक्त करता है

प्रश्न .4 कहानी के अंत में  अलोपीदीन के बंशीधर को  स्थाई मनेजर नियुक्त करने  पीछे क्या कारण हो सकते है? 

उत्तर. 4 पंडित आलोक दिन खुद एक भ्रष्ट व बेईमान व्यक्ति था यह की पैसे के बल पर किसी को भी खरीदा जा सकता हैं या कोई भी कम कराया जा सकता हैं  लेकिन जब उसने अपने जीवन में पहली बार किसी इसे  व्यक्ति को देखा जिसकी ईमानदारी को अपने पैसे से नहीं खरीद पाए हैं वह आश्चर्यचकित रह गया पंडित अलाउद्दीन यह अभी जानता था कि आज के समय में इस तरह का ईमानदार कर्तव्य पालन व धर्मिष्ठ व्यक्ति मिलना मुश्किल है इसलिए उसने बंशीधर को अपनी जायदाद का स्थाई मैनेजर नियुक्त दी

सोमवार, 25 जुलाई 2022

वचन के भेद

                            वचन   

जिन संज्ञा या अन्य विकारी शब्दों से उसके एक या अनेक के होने का बोध हो वह वचन कहलाता है वचन के भेद वचन के दो भेद होते हैं एक वचन बहुवचन एकवचन संज्ञा शब्द के जिस रुप से उसके एक होने का बोध होता हो उसे एक वचन कहते हैं लड़का गाय घोड़ा बच्चा छाता आदि बहुवचन संज्ञा शब्द के जिस रुप से उसके एक से अधिक होने का बोध होता हो उसे बहुवचन कहते हैं जैसे लड़के गाय गाय गाय घोड़े बच्चे छाते आदि संज्ञा सर्वनाम और क्रिया द्वारा वचन की पहचान संज्ञा में वाक्य में संज्ञा सर्वनाम तथा क्रिया के द्वारा पहचान हम निम्न प्रकार से कर सकते हैं  एकवचन बहुवचन बच्चा खेल रहा है बच्चे खेल रहे हैं संज्ञा द्वारा वचन की पहचान वह पढ़ रहा है। वह पढ़ रहे हैं। सर्वनाम द्वारा वचन की पहचान ( मोर सांप खा रहा है। मोर सांप खा रहे हैं। ( क्रिया द्वारा वचन की पहचान  रोटी मांगने वाली)

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2020

लिंग

                    लिंग 

लिंग की परिभाषा =

                        शब्द के जिस रुप से पुरुष और स्त्री जाति का बोध हो उसे लिंग कहते हैं 

      लिंग के दो भेद होते हैं 

     1. पुल्लिंग 

     2.स्त्रीलिंग 

 1.   पुल्लिंग = शब्द के जिस रुप से पुरुष जाति का बोध होता है उसे पुल्लिंग कहते हैं

 उदाहरण = ◆ लड़का खेल रहा है

                 ◆ पेड़ में फल लगे हैं 

                 ◆ मोर नाच रहा है 

दिए गए उदाहरण में लड़का ,पेड़ ,फल ,मोर आदि शब्द पुरुष जाति का बोध करा रहे हैं अतः यह शब्द पुल्लिंग है 

2. स्त्रीलिंग =  शब्द के जिस रूप में स्त्री जाति का बोध होता है उसे स्त्रीलिंग कहते हैं |

उदाहरण =  ◆ अध्यापिकापढ़ा रही है  ।                     ◆ मछली तैर रही है ।

                 ◆गाय घास चर रही है।

दिए गए उदाहरण में अध्यापिका, मछली ,गाय आदि शब्द स्त्री जाति का बोध करा रहे हैं अतः यह शब्द स्त्रीलिंग है।

शनिवार, 30 मई 2020

विशेषण की परिभाषा व उसके प्रकार

                             विशेषण



 विशेषण वह शब्द है जो वाक्य में प्रयोग की गई संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रकट करता है।

( विशेषण शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम पदों की विशेषता बताता है उसे विशेष्य कहते हैं )


 विशेषण के चार भेद होते हैं ।
(1)गुणवाचक विशेषण 
(2)संख्यावाचक विशेषण 
(3)परिमाणवाचक विशेषण 
(4)संकेतवाचक विशेषण


(1) गुणवाचक विशेषण= जिस विशेषण शब्द से संज्ञा सर्वनाम के गुण दोष आकार स्थान रंग दशा अवस्था का बोध हो उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं जैसे- 
         (क) बाग में सुंदर लड़की घूम रही है 
         (ख)आप नीली कमीज पहनेंगे 
         (ग)राधिका पतली है
         (घ) रावण दुष्ट था 

इन वाक्यो मे सुंदर, पतली ,दुष्ट  गुणवाचक विशेषण है

(2) संख्यावाचक विशेषण=  जो विशेषण शब्द संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध कराते हैं उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं जैसे 
          
            (क)पेड़ पर चार चिड़िया बैठी है
             (ख) सभी बच्चे खेल रहे हैं 
 
इन वाक्यों में "चार "और "सभी" क्रमश: चिड़िया और बच्चे की संख्या संबंधी विशेषण का बोध करा रहे हैं अतः यह संख्यावाचक विशेषण है ।

संख्यावाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं 
             (1)निश्चित संख्यावाचक विशेषण                            (2)अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण 

(क)निश्चित संख्यावाचक=  विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित संख्या का बोध कराने वाले विशेषण को निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं जैसे- 
           (क) दो केले देना ।
           (ख) पांचवी कक्षा में 35 बच्चे हैं ।
           (ग) उसके पास चार पुस्तक के हैं ।
   
        इन वाक्यों में दो , 35 तथा चार शब्द एक निश्चित संख्या का बोध करा रहे हैं अतः यह शब्द निश्चित संख्यावाचक विशेषण है।

(ख) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण = संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित संख्या का बोध न कराने वाले विशेषण को अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं जैसे - 
         (क) घर में कुछ लोग आए हैं 
         (ख)कक्षा में आज थोड़े विद्यार्थी आए हैं 
         ( ग)दाल में कुछ नमक ज्यादा है
   
       इन वाक्यों में" कुछ "और "थोड़े" शब्द द्वारा किसी निश्चित संख्या का बोध नहीं हो पा रहा है अतः यह शब्द अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण है ।


(3) परिणाम वाचक विशेषण = परिमाणवाचक विशेषण जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की माप तोल संबंधी विशेषता प्रकट करते हैं उन्हें परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं जैसे - 
         
          (क)मोहन 1 लीटर दूध रोज पीता है                     (ख)सीमा बाजार से 5 किलो आलू लाई। 
      

इन वाक्यों में 1 लीटर तथा 5 किलो शब्द दूध और आलू संज्ञा शब्दों का परिमाण मात्रा का बोध करा रहे हैं अतः.यह शब्द परिमाणवाचक विशेषण है ।


      परिमाणवाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं।                      
        (१) निश्चित परिणाम परिमाणवाचक विशेषण          (२)अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण 
     


(१) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण=  जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित माप तोल का बोध बौद्ध कराते हैं उन्हें निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं जैसे - 
           * 5 किलो चावल 
           * 4 मीटर कपड़ा
          *  1 लीटर तेल
  
 इन वाक्यों में 5 किलो 4 मीटर तथा 1 लीटर रमसा क्रमशः चावल कपड़ा तथा तेल की एक निश्चित मात्रा का बोध करा रहे हैं  अतः यह शब्द परिमाणवाचक विशेषण है

(२) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण = जो शब्द संज्ञा व सर्वनाम की निश्चित माप तोल का बोध नहीं कराते हैं उन्हें अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं जैसे - 
            (क) थोड़े चावल चाहिए 
            (ख) दूध में चीनी कम डालना
            (ग)गिलास में थोड़ा पानी है
 
               इन वाक्यों में "थोड़े" ,"कम" तथा "थोड़ा "शब्द से किसी निश्चित मात्रा का बोध नहीं हो पा रहा है अतः यह शब्द अनिश्चितपरिमाणवाचक विशेषण है
 


             (4)संकेतवाचक विशेषण=  ऐसे सर्वनाम शब्द जो संज्ञा शब्दों से पहले आ कर विशेषण का कार्य करते हैं संकेतवाचक विशेषण या सर्वनामिक विशेषण कहलाते हैं जैसे-
            
        (क) वह लड़की कहां जा रही है 
        (ख) इस कुर्सी को कमरे में रख दो
         (ग) उसको बाहर ले जाओ
 
 इन वाक्यों में वह ,इस और उस शब्द क्रमशः लड़की ,कुर्सी और मेज की ओर संकेत कर रहे हैं अतः यह शब्द संकेतवाचक विशेषण है।




 स्मरणीय तथ्य

* संज्ञा व सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं 

*विशेषण शब्द जिस शब्द की विशेषता बताते हैं उसे विशेष्य कहते हैं 

*विशेषण के चार भेद होते हैं गुणवाचक संख्यावाचक परिमाणवाचक और संकेतवाचक
 
* जो शब्द विशेषण शब्द की विशेषता प्रकट करते हैं उन्हें प्रविशेषण कहते हैं 

*विशेषण की तीन तुलनात्मक अवस्थाएं होती है मूल अवस्था उत्तर अवस्था उत्तम अवस्था 


*जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम के गुण दोष आकार प्रकार स्वाद गंध और काल स्थान आदि का बोध कराएं वह गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं 

*जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की माप तोल का बोध कराएं वह परिमाणवाचक विशेषण होते हैं

शुक्रवार, 29 मई 2020

सर्वनाम की परिभाषा व उसके प्रकार

  •    सर्वनाम- सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ है-  सब अर्थात सबका नाम। यह वह शब्द होते हैं जो वाक्य में विभिन्न संज्ञाओ.के बदले प्रयोग किए जा सकते हैं इसका मुख्य उद्देश्य वाक्यों में संज्ञा के बार -बार प्रयोग से बचना है।

  •   सर्वनाम की परिभाषा- संज्ञा शब्द के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं जैसे मैं ,हम ,तुम, वह आदि। 

  •  सर्वनाम के 6 भेद होते हैं 
  • (1)पुरुषवाचक सर्वनाम
  • (2) निश्चयवाचक सर्वनाम
  • (3) निश्चयवाचक सर्वनाम 
  • (4) संबंधवाचक सर्वनाम
  • (5) प्रश्नवाचक सर्वनाम
  • (6) निजवाचक सर्वनाम 

  • (1)  पुरुषवाचक सर्वनाम = जिस संज्ञा शब्द के स्थान पर बोलने वाला अपने लिए या सुनने वाले के लिए या अन्य किसी के बारे में जिस शब्द का प्रयोग करता है वह पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाता है। जैसे-  
 (क) राम, मोहन से रमेश के विषय में कहता है।

 मैं कहता हूं , "तुम उसके लिए पुस्तक दे दो।"

  "मैं " - बोलने वाले राम के लिए।
" तुम " - सुनने वाले मोहन के लिए।
  "उसके" -  अन्य रमेश के लिए प्रयोग किए गए हैं।

अतः" में " , "तुम"  और "उसके" पुरुषवाचक सर्वनाम है।
        

                    पुरुषवाचक सर्वनाम के भेद

  • उत्तम पुरुष
  •  मध्यम पुरुष 
  • अन्य पुरुष

  • (१)  उत्तम पुरुष बोलने वाला जिस संज्ञा पद के स्थान पर सर्वनाम शब्द का प्रयोग करता है वह उत्तम पुरुष कहलाता है। जैसे- 

  (क)   मैं टहलता  हूं।
  (ख)   हम टहलते है।

" मैं "और" हम "उत्तम पुरुष है।

   (२) मध्यम पुरुष=  बोलने वाला  जिससे बातें कर रहा है या जो उसकी बात सुन रहा है उसके लिए प्रयुक्त सर्वनाम शब्द मध्यम पुरुष होते हैं। जैसे- 

 (क) आप विश्राम कीजिए।

 (ख) तुम कविता सुनाओ।

 "आप "और "तुम "मध्यम पुरुष है क्योंकि यह सुनने वाला और बातें करने वाले के लिए प्रयुक्त शब्द है|

 (३)  अन्य पुरुष = बोलने वाला जिसके विषय में बातें कर रहा है उसके लिए प्रयुक्त सर्वनाम शब्द अन्य पुरुष कहलाता है। जैसे- 

(क) वह बाजार गया।

 (ख) उसकी मां घर पर है। 

 यहां "वह" और "उसकी " अन्य पुरुष है क्योंकि यह शब्द अन्य पुरुष के लिए प्रयोग किए गए हैं 
                    .   (मैं, हम, तुम, तू ,वह ,यह ,आप मुख्य पुरुषवाचक सर्वनाम है।)

  • (2)  निश्चयवाचक सर्वनाम=  जिस शब्द से किसी पास या दूर की वस्तु या व्यक्ति का निश्चयात्मक बोध होता है उसे निश्चयवाचक सर्वनाम शब्द कहते हैं इससे संकेतवाचक सर्वनाम भी कहते हैं। जैसे-  
(क) वह मेरा विद्यालय हैउसमें मैं पढ़ता हूं ।
(ख) वह पेड़ है उन पर चिड़ियों ने के घोसले हैं ।
(ग) यह टेलीविजन है जिससे मैं देश विदेश की खबरें देखता हूं।
(घ)  यह मेरी कक्षा है इसमें मैं पढ़ता हूं ।
    
           इन वाक्यों में वह यह उस इस उन शब्दों से निश्चय का बोध हो रहा है अतः यह शब्द निश्चयवाचक सर्वनाम है।

 (3) आनिश्चयवाचक सर्वनाम = जिन सर्वनाम शब्दों से किसी निश्चित प्राणी या वस्तु का बोध नहीं होता उसे आनिश्चयवाचक सर्वनाम शब्द कहते हैं। जैसे-  

(क) घर में कोई आया है 
 (ख) मामा जी कुछ लाए हैं 
 
 इन वाक्यों में "कोई "और "कुछ "शब्दों से किसी निश्चित प्राणी का बोध नहीं होता अतः यह शब्द  यह आनिश्चयवाचक सर्वनाम है।

  •  (4) संबंधवाचक सर्वनाम=  जिस सर्वनाम शब्द से वाक्य के परस्पर दो सर्वनामों के संबंध स्थापित हो उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं जैसे- 
 (क) जिसकी लाठी उसकी भैंस होती है 
 (ख) जो फसल की भलीभांति देखभाल करता है वह अवश्य अधिक अनाज पता है ।

इन वाक्यों में" जिसकी , उसकी " " जो और वह" शब्दों का आपस में परस्पर संबंध है अतः यह शब्द संबंधवाचक सर्वनाम है

  • (5)  प्रश्नवाचक सर्वनाम=  जिस सर्वनाम शब्द से वाक्य में प्रश्न पूछने का बोध होता है उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं जैसे - 
  (क) रामचरितमानस किसकी रचना है? 
 (ख)  विद्यालय के प्राचार्य कौन हैं ?
इन वाक्यों में "कौन" और" किसकी "शब्दों से प्रश्न पूछने का बोध हो रहा है अतः यह शब्द प्रश्नवाचक सर्वनाम है 


  • (6)  निजवाचक सर्वनाम = अपने लिए अर्थात स्वयं के लिए प्रयोग किए जाने वाले सर्वनाम शब्द निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं ।जैसे-
(क)  वह स्वयं लिख लेगा
(ख) तुम स्वयं आ जाओगे
(ग) मैं अपने आप पढ़ लूंगा

 इन वाक्यों में "स्वयं" और "अपने आप " शब्द का प्रयोग कर्ता के अपनेपन का बोध कराने के लिए हुआ है आधा यह शब्द निजवाचक सर्वनाम है।

  •  महत्वपूर्ण तथ्य
  • लिंग के कारण सर्वनाम पदों में कोई परिवर्तन नहीं होता है 
  • यहां और वहां का प्रयोग पुरुषवाचक और निश्चयवाचक सर्वनाम के लिए होता है
  • तू का प्रयोग आमतौर पर अनादर या बहुत निकटता प्रकट करने के लिए किया जाता है सामान्य रूप में इसका प्रयोग नहीं होता
  • विशिष्ट व्यक्ति के लिए में के स्थान पर हम का प्रयोग करते हैं
  • सम्मान देने के लिए एक वचन संज्ञाओ की तरह सर्वनाम का प्रयोग भी बहुवचन में होता है
  • सर्वनाम शब्दों की मूल रचना में संबोधन नहीं होता है
  • मैं के स्थान पर हम का प्रयोग कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है जिसका प्रयोग अब सामान्य हिंदी में भी होने लगा है


  •  सही विकल्प लगाइए
 (1) संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त शब्द क्या कहलाते हैं ?
         
      (क) संज्ञा के रूप।  (ख)  सर्वनाम  (ग)  सभी का नाम          (घ)  इनमें से कोई नहीं

 (2) सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ क्या है? 
     
      (क) सबका नाम    (ख) सभी नाम   (ग) यह दोनों                   (घ)  इनमें से कोई नहीं 

(3)  निम्नलिखित में से सर्वनाम शब्द का भेद कौन सा है ?

(क) निजवाचक।   (ख)  स्थान वाचक।     (ग)  क्रिया वाचक 
  (घ) कर्म वाचक

(4) सर्वनाम का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
    
      (क)   संज्ञा के बार बार प्रयोग से बचना  (ख) वाक्यों को स्पष्ट बनाना    (ग) उपयुक्त दोनों    (घ)  उपर्युक्त में से कोई नहीं 

(5) निम्नलिखित में से पुरुषवाचक सर्वनाम का भेद कौन सा है ?

(क) उत्तम   (ख) मध्यम   (ग) अन्य। (घ)  यह सभी भेद 


             ..

             उत्तर  = सर्वनाम
                         सब का नाम।  
                         निजवाचक 
                         संज्ञा के बार बार प्रयोग से बचना
                         यह सभी भेद

                    


गुरुवार, 28 मई 2020

संज्ञा की परिभाषा व उसके प्रकार

किसी व्यक्ति वस्तु स्थान भाव आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं |
संज्ञा के मुख्य तीन भेद होते हैं|

(1) व्यक्तिवाचक संज्ञा
(2)जातिवाचक संज्ञा 
(3)भाववाचक संज्ञा 


(1) व्यक्तिवाचक संज्ञा =  शब्दों में किसी विशेष व्यक्ति स्थान अथवा वस्तु का बोध होता है उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं |जैसे - ताजमहल ,आगरा , कोणार्क, उड़ीसा, बाइबिल ,रामायण आदि व्यक्तिवाचक संज्ञा है। क्योंकि यह किसी विशेष स्थान वस्तु या व्यक्ति का बोध करा रही है ।

(क) ताजमहल आगरा में है ।
(ख) कोणार्क उड़ीसा में है ।
(ग) कुरान बाइबल तथा रामायण धार्मिक ग्रंथ है ।

उपरोक्त वाक्य में ताजमहल,  आगरा ,कोणार्क ,उड़ीसा ,कुरान बाइबल ,रामायण व्यक्तिवाचक संज्ञा है ।

(2) जातिवाचक संज्ञा  =  जिन संज्ञा शब्दों में किसी वस्तु व्यक्ति प्राणी या स्थान की संपूर्ण जाति या वर्ग का बोध होता है उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं । जैसे-  हाथी,  सरोवर , बच्चे, बगीचे फूल,  ऊंट आदि जातिवाचक संज्ञा है । 

(क) हाथी सरोवर में नहा रहा है ।
(ख) बगीचे में फूल खिले हैं । 
(ग) बच्चे फिल्म देख रहे हैं। 
(घ)  ऊंट को रेगिस्तान का जहाज कहते हैं । 

उपरोक्त वाक्यों में हाथी,  सरोवर , बच्चे , फिल्म,  ऊंट,  रेगिस्तान , जहाज जातिवाचक संज्ञा है।


(3)  भाववाचक संज्ञा =  संज्ञा शब्दों से किसी वस्तु व्यक्ति प्राणी तथा स्थान के गुण दोष अवस्था तथा स्वभाव आदि का बोध होता है उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं । जैसे-  लंबाई , चौड़ाई मिठास,  प्रेम,  सफलता आदि। 

 (क) कमरे की लंबाई तथा चौड़ाई नापो।
(ख)  सबसे प्रेम से बोलो गन्ने में मिठास कम है।
(ग)  परिश्रम करने से ही सफलता मिलती है ।

उपरोक्त वाक्यों में लंबाई,  चौड़ाई , मिठास,  प्रेम , परिश्रम और सफलता भाववाचक संज्ञा है। 
                       (  भाववाचक संज्ञा को अनुभव किया जा सकता है उसको देखा नहीं जा सकता है   ) 

कुछ विद्वान संज्ञा के दो भेद और मानते हैं
(4) द्रव्यवाचक संज्ञा 
(5) समूहवाचक संज्ञा

(4)  द्रव्यवाचक संज्ञा  =  संज्ञा शब्दों से किसी पदार्थ का या द्रव का बोध होता है उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।  जैसे - सोना ,चांदी , लोहा , पीतल , मिट्टी आदि ।

(5)  समूह वाचक संज्ञा  =  संज्ञा शब्दों से किसी जाति के समूह का बोध होता है उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं । जैसे = कक्षा , झुंड , दल , सेना आदि 
इसे समुदाय वाचक संज्ञा भी कहते हैं 


सही विकल्प लगाइए 

(1)  संज्ञा से क्या तात्पर्य है
       (1) कर्म.   (2) स्वभाव   (3). नाम. (4) जाति 

(2) संज्ञा के मुख्यतः कितने भेद होते हैं  
        (1)दो       (2). 2.   (3). 3.    (4). 4

(3)  इनमें से संज्ञा के मुख्य भेद कौन से हैं
        (1)  व्यक्तिवाचक   (2) जातिवाचक (3)  भाववाचक             (4) यह सभी

(4) इनमें से भाववाचक संज्ञा कौन सी है
        (1)  मीठा    (2) मिठास   (3) मिठाई। (4) मीठापन 

(5) सूरज किस प्रकार की संज्ञा का भेद है ।
       (1) व्यक्तिवाचक   (2) जातिवाचक  (3) भाववाचक               (4)द्रव्यवाचक 
   

        उत्तर =  नाम , तीन ,  यह सभी,  मिठास,  व्यक्तिवाचक।